राम के धनुष तोड़ते ही काँप गया ब्रमांड | Sita Swayamwar - सीता स्वयंमवर | Ramayan Ramanand Sagar

Author channel Purana Hindustan   6 month ago
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धनुष तोड़ने पर परशुराम का क्रोध !! राम और परशुराम मिलन !! Ramayan HD ...

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देवराज इंद्र का अहंकार किया चकनाचूर उठाई गोवर्धन पर्वत | J...

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सौ हाथियों के बराबर बलवान भीम का घमंड हुआ चकनाचूर | जय बजर...

सौ हाथियों के बराबर बलवान भीम का घमंड हुआ चकनाचूर | जय बजरंगबली - Hanuman and Bhim

सनकादि मुनियों का श्राप | हिरण्याक्ष-हिरण्यकश्यपु रावण-क...

एक समय चारों सनकादि कुमार भगवान विष्णु के दर्शनार्थ वैकुण्ठ जा पहुंचे। वे वहाँ के सौंदर्य को देखकर बड़े प्रसन्न हुए। वहाँ स्फटिक मणि के स्तंभ थे, भूमि पर भी अनेकों मणियाँ जड़ित थीं। भगवान के सभी पार्षद नन्द, सुगन्ध सहित वैकुण्ठ के पति का सदैव गुणगान किया करते हैं। चारों मुनि छः ड्योढ़ियाँ लाँघकर जैसे ही सातवीं ड्योढ़ी पर चढ़े उनका दृष्टिपात दो महाबलशाली द्वारपाल जय तथा विजय पर हुआ। कुमार जैसे ही आगे बढ़े दोनों द्वारपालों ने मुनियों को धृष्टतापूर्वक रोक दिया। यद्यपि वे रोकने योग्य न थे इसपर सदा शांत रहने वाले सनकादि मुनियों को भगवत् इच्छा से क्रोध आ गया। वे द्वारपालों से बोले "अरे! बड़ा आश्चर्य है। वैकुण्ठ के निवासी होकर भी तुम्हारा विषम स्वभाव नहीं समाप्त हुआ? तुम लोग तो सर्पों के समान हो। तुम यहाँ रहने योग्य नहीं अतः तुम नीचे लोक में जाओ। तुम्हारा पतन हो जाये।" इसपर दोनो द्वारपाल मुनियों के चरणों पर गिर पड़े। तभी भगवान का आगमन हुआ। मुनियों नें भगवान को प्रणाम किया। श्री भगवान कहते हैं "हे ब्रह्मन्! ब्राह्मण सदैव मेरे आराध्य हैं। मैं आपसे मेरे द्वारपालों द्वारा अनुचित व्यवहार हेतु क्षमा प्रार्थी हूँ।" उन्होंने द्वारपालों से कहा "यद्यपि मैं इस श्राप को समाप्त कर सकता हूँ परंतु मैं ऐसा नहीं करुंगा क्योंकि तुम लोगों को ये श्राप मेरी इच्छा से ही प्राप्त हुआ है। तुम लोग इसके ताप से तपकर ही चमकोगे, यह परीक्षा है इसे ग्रहण करो। एक बात और... तुम मेरे बड़े प्रिय हो।" द्वारपालों ने श्राप को ग्रहण किया। मुनियों ने कहा "प्रभु! आप तो हमारे भी स्वामी हैं और सब ब्राह्मणों का आदर करते हुए सभी लोग मुक्ति को प्राप्त करें यह सोचकर हमें आदर प्रदान करते हैं। प्रभु आप धन्य हैं। सदैव हमारे हृदय में वास करें। और द्वारपालों की मुक्ति आपके करकमलों से ही होगी" भगवान ने द्वारपालों को कहा "द्वारपालों तुम तीन जन्म तक राक्षस योनि में जाओगे तथा मैं तुम्हारा उद्धार करुंगा।" इसी श्राप के कारण ये दोनों द्वारपाल तीन जन्मों तक राक्षस बने। प्रथम जन्म में ये दोनों ही हिरण्याक्ष तथा हिरण्यकश्यपु बनें, द्वितीय में रावण तथा कुम्भकर्ण तथा तृतीय जन्म में ये ही शिशुपाल तथा दन्तवक्र बने ► Youtube Subscribe link - https://goo.gl/UwxBqY रामायण Ramayan Playlist - https://goo.gl/6vrGwn महाभारत कथा Mahabharat Playlist - https://goo.gl/H4Hea3 कृष्ण लीला Krishna - https://goo.gl/ULQ6KR Share | Support | Subscribe - https://goo.gl/UwxBqY Subscribe : https://goo.gl/lqSFRP Website : www.icanspirit.com Youtube - http://www.youtube.com/WECANSPIRIT About : We Can Spirit is a YouTube Channel,where you will find Indian epic episodes in Hindi Language

धनुष तोड़ते ही सीता का विवाह | Ramayan: Ram Vivah: राम विवाह

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राम के धनुष तोड़ते ही काँप गया ब्रमांड | Sita Swayamwar - सीता स्वयंमवर | Ramayan Ramanand Sagar

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